वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोट समप्रभा। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थात् मैं भगवान गणेश को नमस्कार करती हूँ, जिनके शरीर का आकार बहुत बड़ा है, जिनकी तुंड वक्र (हाथी की सूंड) के समान मुड़ी हुई है, जिनकी ज्योति करोड़ों सूर्य के समान उज्जवल प्रतीत होती है। मैं उनसे यह प्रार्थना करती हूँ कि वह हम सबको यह आशीर्वाद दें कि हम सबके सभी कार्य सदैव बिना किसी विघ्न के संपन्न होते रहें।

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गणेश जी का महत्व
हिंदू धर्म में पूजन में भगवान गणेश की सभी देवी-देवताओं से पहले पूजा की जाती है। भगवान गणेश महादेव भोलेनाथ तथा माता पार्वती के पुत्र हैं। वह विघ्नों के नाशक अर्थात् विघ्न हर्ता कहलाते हैं।
आइए जानते हैं कि सर्वप्रथम भगवान गणेश को ही क्यों पूजा जाता है।
प्रथम पूजन के अधिकारी
इस संबंध में एक प्राचीन कथा प्रचलित है। एक बार सभी देवताओं में यह प्रश्न उठा कि पृथ्वी पर सर्वप्रथम किस देवता की पूजा होनी चाहिए। तब भगवान शिव ने सोच-विचार कर एक प्रतियोगिता आयोजित की।
प्रतियोगिता का नियम था कि जो देवता अपने वाहन पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करके प्रथम लौटेंगे, वही इस पृथ्वी पर सर्वप्रथम पूजन के अधिकारी होंगे।
यह सुनकर सभी देवता अपने वाहनों पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए चल पड़े।
गणेश जी की बुद्धिमानी
उस समय भगवान गणेश को एक उपाय सूझा। उन्होंने अपने पिता शिव तथा माता पार्वती के चारों ओर परिक्रमा की तथा शांत भाव से उनके सम्मुख हाथ जोड़कर खड़े हो गए।
भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करके वापस लौटे तथा बोले, “पिताश्री, मैं इस प्रतियोगिता में विजयी हुआ। अतः आज से इस पृथ्वी पर सर्वप्रथम पूजन का अधिकारी मैं हूँ।”
शिव जी का निर्णय
यह सुनकर भगवान भोलेनाथ ने प्रसन्न मुद्रा से भगवान गणेश को देखकर कहा, “गणेश अपने माता-पिता की परिक्रमा करके यह प्रमाणित कर चुका है कि माता-पिता से बढ़कर इस ब्रह्मांड में कुछ भी नहीं है। अतः आज से गणेश इस पृथ्वी पर प्रथम पूजन के अधिकारी हैं।”
और उसी दिन से प्रत्येक कार्य में, प्रत्येक पूजन में भगवान गणेश को सर्वप्रथम पूजा जाता है।
गणेश जी का बीज मंत्र
भगवान गणेश का बीज मंत्र है – “ॐ गं गणपतये नमः”
इस मंत्र का जाप करने से भगवान गणेश बुद्धि प्रदान करते हैं।
अंत में मैं आप सभी पाठकों का धन्यवाद करती हूँ तथा यह आशा करती हूँ कि आप सबको मेरा यह ब्लॉग अवश्य पसंद आया होगा। आप अपने मूल्यवान सुझाव और विचार टिप्पणियों में अवश्य साझा करें।
धन्यवाद!