आपके फोन की चिप अब भारत में भी बनेगी
आपके फोन, लैपटॉप, कार और यहां तक कि वॉशिंग मशीन में जो छोटी सी चिप होती है — वही सेमीकंडक्टर है। अब तक भारत इन चिप्स के लिए लगभग पूरी तरह ताइवान, चीन और दक्षिण कोरिया पर निर्भर था। 2021 में शुरू हुआ India Semiconductor Mission (ISM) इसी निर्भरता को तोड़ने का सबसे बड़ा दांव है — और 2026 में इसके नतीजे जमीन पर दिखने लगे हैं।
2026 की जमीनी हकीकत: फैक्ट्रियां चल पड़ी हैं
SEMICON India 2026 में प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत में अब पांच चिप असेंबली और पैकेजिंग प्लांट कमर्शियल प्रोडक्शन में हैं। यह सुनने में तकनीकी लगता है, लेकिन इसका मतलब सीधा है: भारत में अब सच में चिप्स बन रही हैं।
कौन-कहां क्या कर रहा है:
- Micron (Sanand, Gujarat) — फरवरी 2026 से ऑपरेशनल। DRAM और NAND मेमोरी चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग हो रही है — वही चिप्स जो फोन और लैपटॉप की RAM और स्टोरेज में लगती हैं। निवेश लगभग ₹22,500 करोड़।
- Tata Electronics + PSMC (Dholera, Gujarat) — भारत का पहला प्योर-प्ले सिलिकॉन वेफर फैब निर्माणाधीन। लगभग ₹91,500 करोड़ का निवेश, 50,000 वेफर प्रति माह की प्लान्ड क्षमता। पहली वेफर 2026 के अंत तक और बड़े पैमाने पर उत्पादन 2028 के आसपास का लक्ष्य।
- Tata (Jagiroad, Assam) — असेंबली और टेस्टिंग फैसिलिटी, लगभग ₹27,000 करोड़ का निवेश।
- Kaynes Semicon और CG Semi — 2026 में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करने वाले प्लांट्स में।
- CDIL (Mohali) और Suchi Semicon (Surat) — SEMICON India 2026 में इनकी प्रोडक्शन लाइनों का उद्घाटन हुआ।
कुल मिलाकर पहले चरण में लगभग 12 प्रोजेक्ट अप्रूव हुए हैं, जिनमें ₹1.64 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश जुड़ा है। और जुलाई 2026 में सरकार ने Semicon 2.0 को मंजूरी दी — ₹1.27 लाख करोड़ का प्रोग्राम जो सिर्फ फैब पर नहीं, बल्कि डिजाइन, इक्विपमेंट, मटेरियल, R&D और टैलेंट पर फोकस करेगा।
Fab बनाम ATMP: फर्क समझिए
खबरों में दो शब्द बार-बार आते हैं:
- Fab (Fabrication): जहां सिलिकॉन वेफर पर असली चिप बनती है — सबसे मुश्किल, सबसे महंगा काम। भारत में अभी सिर्फ Tata-PSMC का फैब बन रहा है।
- ATMP (Assembly, Testing, Marking, Packaging): बनी हुई चिप को पैक करके इस्तेमाल लायक बनाना। भारत के पांचों ऑपरेशनल प्लांट इसी कैटेगरी में हैं।
यह कोई छोटी बात नहीं — ATMP से भारत ग्लोबल चिप सप्लाई चेन का हिस्सा बन गया है। मंत्री के अनुसार इन यूनिट्स का आउटपुट जापान, अमेरिका और यूरोप को एक्सपोर्ट हो रहा है। लेकिन “भारत में चिप बन रही है” का पूरा मतलब तभी होगा जब Dholera का फैब चालू होगा।
नौकरियां: युवाओं के लिए क्या है
सरकार का लक्ष्य इस मिशन से 1 लाख डायरेक्ट नौकरियां पैदा करना है। फैब और ATMP प्लांट में चाहिए:
- इंजीनियर — इलेक्ट्रॉनिक्स, मटेरियल साइंस, केमिकल इंजीनियरिंग बैकग्राउंड
- टेक्नीशियन — क्लीनरूम ऑपरेशन, इक्विपमेंट मेंटेनेंस (ITI/डिप्लोमा स्तर पर भी अवसर)
- चिप डिजाइन इंजीनियर — भारत पहले से ही ग्लोबल चिप डिजाइन का हब है (बेंगलुरु में कई बड़ी कंपनियों के डिजाइन सेंटर हैं); Semicon 2.0 में डिजाइन पर और जोर है
105 से ज्यादा स्टार्टअप को अब EDA टूल्स (चिप डिजाइन सॉफ्टवेयर) की एक्सेस मिल रही है — यानी छोटी कंपनियां भी चिप डिजाइन कर सकती हैं।
चुनौतियां भी हैं
- पानी और बिजली: एक फैब को रोज लाखों लीटर शुद्ध पानी और स्थिर बिजली चाहिए — Dholera जैसे इलाकों में यह बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है।
- टैलेंट: अनुभवी फैब इंजीनियर भारत में कम हैं; ताइवान और अन्य देशों से विशेषज्ञ लाने पड़ रहे हैं।
- समय: सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम दशकों में बनता है। ताइवान की TSMC को आज की स्थिति तक पहुंचने में 30+ साल लगे।
आम भारतीय के लिए इसका मतलब
छोटे में कहें तो: आपके अगले फोन या लैपटॉप की चिप पर “Made in India” की मुहर लगने में अभी 2–3 साल हैं, लेकिन सफर शुरू हो चुका है। नौकरियों के लिहाज से इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर अगले दशक का बड़ा सेक्टर बनने जा रहा है — और इसमें एंट्री के लिए जरूरी स्किल्स आज सीखी जा सकती हैं।
दुनिया से तुलना: भारत कहां खड़ा है
संदर्भ के लिए: ताइवान की TSMC दुनिया की 60% से ज्यादा एडवांस्ड चिप्स बनाती है, दक्षिण कोरिया की Samsung मेमोरी चिप्स में बादशाह है, और अमेरिका CHIPS Act के तहत अरबों डॉलर झोंक रहा है। भारत की रणनीति अलग है — पहले ATMP और मेच्योर-नोड फैब से इकोसिस्टम बनाना, फिर एडवांस्ड नोड की ओर बढ़ना।
यह समझदारी भरा रास्ता है। चीन ने भी 2000 के दशक में पैकेजिंग-टेस्टिंग से शुरुआत की थी। भारत का फायदा: विशाल घरेलू बाजार (हर साल करोड़ों फोन बिकते हैं), चिप डिजाइन में पहले से मौजूद टैलेंट, और सरकार की लंबी अवधि की फंडिंग प्रतिबद्धता।
छात्रों के लिए रास्ता
अगर आप इस फील्ड में आना चाहते हैं:
- B.Tech (ECE/EE) के बाद VLSI डिजाइन में M.Tech या PG डिप्लोमा — CDAC और कई प्राइवेट इंस्टीट्यूट कोर्स कराते हैं
- NPTEL/SWAYAM पर IITs के फ्री VLSI और सेमीकंडक्टर फिजिक्स कोर्स
- इंटर्नशिप — Micron, Tata Electronics और Kaynes जैसी कंपनियां अब भारत में ही इंटर्न ले रही हैं
सेमीकंडक्टर वह सेक्टर है जहां अगले 10 साल में भारत में लाखों हाई-स्किल नौकरियां बनेंगी — और तैयारी आज से शुरू होती है।